एकलव्यों की शहादत और रोहित वेमुला की शहादत को शत्- शत् नमन्...
दलित अस्मिता के लंबे संघर्ष और ज्ञान सहित ज्ञान की ऐतिहासिक राजनीति के सन्दर्भ में चार बहुत महत्वपूर्ण प्रतीक हैं जो बहुत गहराई से ध्यान में रखे जाने चाहिए. ये चार प्रतीक चार दिशाओं की तरह हैं जो इस सन्दर्भ विशेष में आज तक उभरी चार आत्यंतिक संभावनाओं को उनकी प्रेरणाओं और सफलताओं असफलताओं के साथ उजागर करते हैं. दलित अस्मिता के संघर्ष के भूत, वर्तमान और भविष्य को इन चार प्रतीकों के आईने में रखकर देखिये आप न सिर्फ कारणों और प्रक्रियाओं को देख पाएंगे बल्कि समाधान को भी देख पाएंगे. ये चार प्रतीक कौनसे है? ये चार प्रतीक ऐतिहासिक क्रम में इस प्रकार हैं: एकलव्य विवेकानन्द, अंबेडकर और हाल ही में उभरे रोहित वेमुला. इन चारों में कुछ हद तक वैचारिक संगति है लेकिन थोड़ी ही दूर चलकर वह संगति भंग हो जाती है और चारों के मार्ग अलग अलग हो जाते हैं. अब कई लोगों को इन चारों में संगति या विसंगति की खोज और इस खोज से निकलने वाले विमर्श से कष्ट हो सकता और वे इस पूरे प्रयास को एक प्रक्षेपण या आरोपण भी कहेंगे. लेकिन इसके बावजूद इस तरह के विमर्श को विकसित करके चर्चा में लाने का समय आ चुका है. इन चार व्यक्तियों मे...