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क्या आपको इस बात का एहसास है?

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यदि कोई इंसान अपनी ज़िंदगी से ख़ुश, संतुष्ट नहीं है और अकेलापन महसूस कर रहा है, तो ज़ाहिर है अपनी ज़िंदगी की ये कमी वो किसी और माध्यम से पूरी करने की कोशिश करता है। ये माध्यम कुछ भी हो सकता है। आज ई क्रांति के इस युग में इस माध्यम की भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है। कुछ लोग अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों ज़िंदगी की हर पल की अपडेट सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं और उस पर मिले कमेंट्स और लाइक्स से न ज़ाने उन्हें कौन-सी तृप्ति मिलती है? सोशल मीडिया अपने विचारों को मास तक पहुंचाने का एक अच्छा ज़रिया है, मगर वो विचार समाज और देश के हित में होने चाहिए। किसी की निजी ज़िंदगी के बारे में जानकर भला किसी को क्या मिलेगा। मगर लोगों को ये बात समझ नहीं आती। ख़ासकर लड़िकयां/महिलाएं वो हर दिन अपनी फोटो या यूं कहें कि उल-जूलूल सेल्फी भी सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं। कई बार तो सेल्फी का एंगल इतना बुरा होता है कि ख़ूबसूरत महिला भी डरावनी दिखने लगती है, मगर बावजूद इसके ऐसी सेल्फी को लोग ख़ूब लाइक करते हैं और अपनी सेल्फी पर मिली लाइक से महिला ऐसे ख़ुश होती है मानों उन्हें दीवाली का बोनस एडवांस में मिल गया हो। ज...

भारत के मूलनिवासी चूंकि जंगल की रक्षा करते थे इसलिए उन्हें रक्षक यानी राक्षस कहा गया !

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-आर्यों का मूल स्थान सेन्ट्रल एशिया में मुख्यत: सूमेरियन यूरेशियन थे।  -आर्य मुख्यत पशु पालन का काम करते थे  -आर्य जब भारतीय उप महाद्वीप में आये तो यहाँ घने जंगल थे  -आर्यों को गायों के लिए घास के मैदानों व स्थानीय आदिवासियों की ज़रूरत थी । जंगलों को नष्ट कर, मैदान तैयार करने के लिए आर्यों नें जंगलों को आग(दावानल) लगाना प्रारम्भ किया।  -आर्यों द्वारा की गयी दावानल को आर्यगण यज्ञ का नाम देते थे ।लेकिन भारतीय मूल निवासी जंगल पर आधारित जीवन जीते थे। इसलिए मूलनिवासी जंगल में लगी हुई आग को बुझा देते थे। इसीलिये आर्य कहते थे कि ये जंगलो के रक्षस हमारे यज्ञ में बाधा डालते हैं। भारत के मूल निवासी चूंकि जंगल की रक्षा करते थे इसलिए उन्हें रक्षक यानी राक्षस कहा गया। आर्यों के धर्मग्रंथों में राक्षसों का वर्णन ध्यान से पढ़िए: -उसमें लिखा गया है कि राक्षस काले रंग के होते थे। -राक्षसों के घुंघराले बाल होते थे। -राक्षसों के सींग होते थे। -राक्षसों का यह वर्णन यहाँ के मूल आदिवासियों का वर्णन है। -भारत के मूल निवासी सांवले/श्याम रंग के थे। -घुंघराले काले बा...

हम आदिवासी थे, आदिवासी है, ओर आदिवासी रहेगेँ...

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जिनके पास कटु सत्य से सामना करने का साहस है, ऐसे सभी सुधीजन आदर के साथ आमंत्रित हैं.. हमारी तहजीब को तुमने विज्ञापनों में उतारा हमारी नैसर्गिक परम्पराओं ने तुम्हारा मनोरंजन संवारा, हमारी संस्कृति, तुम्हारी शादी में नाचती-बजाती है हमारी जांगर तोड़ मेहनत तुम्हारे आलीशान घरों में कम मजदूरी पाती हैँ। हमारी कलाकृतियाँ, तुम्हारे ड्राइंग रूम की शोभा बनती हैं हमारी सेल्फी, अब तुम्हारे मेहमानों के लिए भी जमती है। हमारे लिए नमक भी तुम्हारी राजनीति का सौदा हो गयी आदिवासी होने का सर्टिफिकेट मुख्यमंत्री का ओहदा हो गयी... जंगली उत्पाद तुम्हारे इम्पोर्ट- एक्सपोर्ट के धंधे बन गए हमारी बदौलत न जाने कितनों के महल तन गए... हमारे अर्धनग्न आधे पहनावे तुम्हारी दर्शनीय वस्तु हो गयी ओ मनुवादी शहरी जीव! तुमसे मिलकर हमारी तो ओरिजिनलिटी खो गयी... हमारे पर्वतों, खदानों के लौह अयस्क तुम्हारे उद्योग बन गए हम भूखे रहे, हमारी जड़ी-बूटियाँ तुम्हारे उत्तम भोग बन गए, हमारी निःस्वार्थता और भोलेपन का कितना ओर दोहन करोगे ? क्या अब हमारी लंगोटी का भी चीर हरण करोगे ?? हमारी वेशभूषा पहनकर तुम्हारे नेता तस्वीरें खिंचवाते हैं...